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भैरो सिंह राठौड़ का जीवन परिचय, Bhairo Singh Rathaud Ka Jivan Parichay

    भैरो सिंह राठौड़ का जीवन परिचय, Bhairo Singh Rathaud Ka Jivan Parichay

    भैरों सिंह राठौड़ की जीवनी हिंदी में: भारत पाकिस्तान 1971 के युद्ध को आज 50 साल से भी ज्यादा वर्ष हो चुके हैं। इस युद्ध में भारतीय सेना के 120 से भी ज्यादा जवानों ने अपनी भूमिका निभाई थी। इस युद्ध के दौरान पश्चिमी राजस्थान के धोरों में स्थित जैसलमेर के लोंगेवाला पोस्ट पर कई BSF जवानों को तैनात किया गया था।

    बीएसएफ के जवानों में से एक बीएसएफ जवान ने इस युद्ध को जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिनका नाम भैरो सिंह राठौड़ है, जिनके बारे में शायद ही आज की युवा पीढ़ी जानती हैं। इस युद्ध में भैरों सिंह राठौड़ ने अपने अदम्य साहस का परिचय दिया था।

    हाल ही में भैरो सिंह राठौड़ के स्वास्थ्य खराब होने के कारण इन्हे अस्पताल में भर्ती किया गया, जिसके बाद यह खबरों में छाए हुए हैं। आज इस लेख में हम भैरों सिंह राठौड़ का जीवन परिचय, भैरो सिंह राठौड़ कौन हैं एवं भारत-पाक युद्ध में उनके योगदान के बारे में जानेंगे।

    भैरो सिंह राठौड़ का जीवन परिचय (Bhairon Singh Rathore Biography in Hindi)

    नाम भैरो सिंह राठौड़
    जन्म स्थान सोलंकियातला, शेरगढ़, जोधपुर (राजस्थान)
    पत्नी का नाम प्रेम कंवर
    पहचान 1971 के भारत-पाक युद्ध में अहम भूमिका
    निधन 19 दिसम्बर 2022

    भैरो सिंह राठौड़ का जन्म

    भैरो सिंह राठौड़ का जन्म राजस्थान में शेरगढ़ के सोलंकियातला गांव में हुआ था। सन 1963 में इन्होंने बीएसएफ को ज्वाइन किया और 1971 में इन्हें जैसलमेर के लोंगेवाला पोस्ट पर तैनात किया गया था। उस समय उनके साथ 14 बटालियन और भी तैनात थी।

    भारत पाकिस्तान के युद्ध में अपनी वीरता का प्रदर्शन करने के बाद यह अपने गांव वापस आए और युद्ध के बाद इन्होंने विवाह किया। इनका विवाह सन 1973 में प्रेम कंवर नाम की महिला के साथ हुआ था। बात करें भैरो सिंह के शिक्षा की तो बताया जाता है कि भैरो सिंह पढ़े-लिखे नहीं थे। भैरो सिंह 1987 में सेना से सेवानिवृत्त हुए थे।

    हालांकि एक समय इंटरव्यू में इन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा था कि इनके पास गांव में मात्र 25 बीघा जमीन है। उन्होंने सरकार से जमीन मांगी है लेकिन इन्हें मिल नहीं रही। यहां तक की इनकी पेंशन राशि भी काफी कम है। इनका परिवार पूरी तरह खेती पर निर्भर है।

    1971 के भारत-पाक युद्ध में भैरो सिंह राठौड़ का योगदान

    भैरो सिंह राठौड़ ने एक बार इंटरव्यू के दौरान बताया था कि 1971 के भारत-पाक युद्ध जैसलमेर के लोंगेवाला पोस्ट पर इन्हें बीएसएफ की 14 बटालियन के साथ तैनात किया गया था। वहां भारत-पाक सीमा पर लोंगेवाला पोस्ट पर मेजर कुलदीप सिंह को भी 120 सैनिकों की टुकड़ी के साथ तैनात किया गया था। सबने मिलकर पाकिस्तान के टैंक नष्ट करते हुए दुश्मन सैनिकों को धूल चटाई थी।

    लोंगेवाला पोस्ट भारत-पाक के बॉर्डर से करीबन 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था और बीएसएफ कंपनी को दूसरे पोस्ट पर भेज दिया गया था। लेकिन भैरो सिंह राठौड़ को बटालियन के गाइड के तौर पर लोंगेवाला पोस्ट पर ही तैनाती का आदेश मिला था।

    तभी आधी रात को संदेश मिला कि पाकिस्तानी सेना पोस्ट की ओर बढ़ रही है और उनके पास बड़ी संख्या में टैंक भी है। उस समय भारत के सेना ने इंडियन एयर फोर्स से मदद मांगी ताकि वे हवाई हमला कर सके। लेकिन रात होने के कारण मदद नहीं मिल सकी।

    करीबन 2:00 बजे पाक सेना ने टैंक से गोले बरसाने शुरू कर दिए। इधर हमारे देश की सेना भी उन्हें सबक सिखाने में लग चुकी थी। दोनों देशों की सेनाओं के बीच घमासान लड़ाई चल रही थी। लेकिन उसी दौरान पंजाब रेजीमेंट के 23 जवानों में से एक मारा गया।

    तब भैरों सिंह राठौड़ ने अपनी लाइट मशीन गन उठा ली और फिर वह आगे बढ़ते दुश्मन पर ताबड़तोड़ हमला करते रहे। लगातार 7 घंटे तक यह फायरिंग करते रहे और सूरज निकलने के साथ ही वायुसेना के विमान भी तब तक आ पहुंचे थे। जिसके बाद भी बहुत गोलीबारी शुरू हुई और इससे दुश्मन सैनिकों को गहरा नुकसान पहुंचा।

    इस तरीके से उन्होंने वहां पर अपनी बहादुरी का प्रदर्शन किया। उस समय मानो इन्होंने करो या मरो का दृढ़ संकल्प ले लिया था। यही कारण है कि अंत में उस युद्ध में भारत विजय हुआ। इस युद्ध में भैरों सिंह राठौड़ ने एलएमजी से 2 दर्जन से भी अधिक पाक सैनिकों को मार गिराया था।

    भैरो सिंह राठौड़ की स्वास्थ्य संबंधित समस्या

    भैरो सिंह राठौड़ 81 साल के हो चुके हैं। कुछ समय से ही उनका स्वास्थ्य खराब था। लेकिन अंत में उनका स्वास्थ्य पूरी तरह खराब हो गया तब उन्हें 14 दिसंबर 2022 को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स जोधपुर में भर्ती कराया गया।

    अस्पताल में भैरो सिंह राठौड़ के भर्ती होने की खबर इनके बेटे सवाई सिंह ने दी। डॉक्टर के अनुसार भैरो सिंह राठौड़ को ब्रेन स्ट्रोक हुआ है, जिसके कारण उनकी बॉडी में मूवमेंट की दिक्कत हो रही है। कुछ पैरालिसिस जैसे लक्षण नजर आ रहे हैं, जिस कारण आईसीयू में इनका फिलहाल उपचार चल रहा था। 19 दिसम्बर 2022 को उन्होंने अंतिम सांस ली।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ली भैरो सिंह राठौड़ की स्वास्थ्य जानकारी

    सीमा सुरक्षा बल बीएसएफ के सेवानिवृत्त लांस नायक भैरों सिंह राठौड़ के अस्पताल में भर्ती होने की जब खबर आई तो भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे फोन पर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी और उन्हें कहा कि सन 1971 के भारत-पाक युद्ध में उनके योगदान के लिए राष्ट्र हमेशा उनका ऋणी रहेगा। वे जल्दी ठीक हो जाए, इसके लिए देश प्रार्थना कर रहा है।

    इतना ही नहीं भारत-पाकिस्तान मोर्चे की रखवाली के लिए जिम्मेदार सेना के जनरल ऑफिसर कमांडिंग भी भैरो सिंह के स्वास्थ्य एवं उपचार के बारे में पूछताछ करने के लिए अस्पताल का दौरा कर चुके हैं।

    सेना पदक से सम्मानित किया गया था

    1971 के भारत-पाक युद्ध में अपना अदम्य साहस दिखाने के कारण भैरो सिंह राठौड़ को सन 1972 में भारत सरकार के द्वारा सेना पदक से सम्मानित किया गया था। हालांकि इन्हें अन्य कई सैन्य एवं असैन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

    राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री बरकतुल्लाह खान ने भी इन्हें सम्मानित किया था। बीएसएफ के स्थापना दिवस समारोह के लिए सीमावर्ती शहर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कुछ साल पहले गए थे, उस दौरान भैरो सिंह राठौड़ से मुलाकात की थी।

    फिल्म में निभाया गया था भैरो सिंह राठौड़ का किरदार

    वर्ष 1997 में जेपी दत्ता की आई फिल्म “बॉर्डर” लगभग हर किसी ने देखी होगी, जो भारत-पाक युद्ध के आधार पर बनाई गई थी। इस फिल्म में सनी देओल, सुनील शेट्टी जैसे कई लोकप्रिय अभिनेता ने अपनी भूमिका निभाई थी। इस फिल्म में सुनील शेट्टी ने भैरो सिंह सोलंकियातला का किरदार अदा किया था।

    लेकिन बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि सुनील शेट्टी ने जो भूमिका निभाई थी, वह कोई और नहीं बल्कि भैरो सिंह राठौड़ की भूमिका थी। हालांकि फिल्म के अंत में इस किरदार को शहीद बता दिया जाता है। यहां तक कि इस फिल्म में भैरो सिंह राठौड़ की पत्नी का नाम फुल कँवर बताया गया था जबकि वास्तविक में उनकी पत्नी का नाम प्रेम कंवर है।

    इतना ही नहीं इस फिल्म में उनकी भूमिका निभाने वाले सुनील शेट्टी को असिस्टेंट कमांडेंट स्तर का अधिकारी दिखाया गया है लेकिन असल में तो भैरों सिंह आशिक्षित थे वह बीएसएफ में एक नायक थे।

    निष्कर्ष

    भैरो सिंह राठौड़ उन गुमनाम सैनिकों में से एक हैं, जिन्होंने सन 1971 के भारत-पाक युद्ध में अपना अदम्य साहस दिखाया था। भैरो सिंह राठौड़ की बहादुरी और इनके हिम्मत और इनके जज्बे के कारण भारत हमेशा ही इनका ऋणी रहेगा।

    हमें उम्मीद है कि भैरो सिंह राठौड़ का जीवन परिचय आपको पसंद आया होगा। इस लेख इसको ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि इस गुमनाम नायक के बारे में हर किसी को पता चले। इस लेख से संबंधित कोई भी प्रश्न या सुझाव हो तो आप हमें कमेंट में लिख कर बता सकते हैं।

     

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